गर्भावस्था में टी.बी ( तपेदिक रोग ) -

टी.बी जिसे शय रोग या तपेदिक भी कहा जाता है , यह एक बीमारी है को मुनष्य के फेफड़ों को नुकसान पहुंचती है | इस रोग के कुछ जीवाणु होने है , जो की स्वासनाली के रस्ते मुनष्य के नादर जाते है और वह मनुष्य बीमार हो जाता है | यह बीमारी फेफड़ों को नुकसान करती है |

यह एक संक्रमित रोग है जो जीवाणुओं से फैलता है | यह काफी हानिकारण रोग है जो की फेफड़ों के इलावा रीड की हड्डी , किडनी एवं कई अन्य अंगों को भी नुकसान कर सकता है |

तपेदिक या टी.बी के प्रभाव -

शरीर की एक प्रतिरक्षा प्रणाली होती है जो की शरीर को बिमारियों के हमले से बचती है | तपेदिक के जीवाणु शरीर के अंदर दाखिल होते ही सबसे पहले इस रक्षा प्रणाली को खतम कर देते हैं | इसके बाद आपके शरीर के दूसरे अंगों पर हमला कर उन्हें कमजोर क्र देगा |

भारत में तपेदिक का उपचार बाकि देशों की चलने में काफी सस्ता है | भारत में टी.बी के उपकाहर के लिए बहुत अच्छे चित्सक एवं अस्पताल हैं | जहा पर जा कर आप काम कीमतों में टी.बी का उपचार करवा सकते हैं |

तपेदिक के लक्षण -

– मनुष्य का वजन काम होना शुरू हो जाता है और भूख बहुत काम लगती है |

– थोड़ा सा काम करने पर थकाम मेहसूस होने लगती है और खाना अच्छा लगना बंद हो जाता है | खाने को बिलकुल मन नहीं करता |

– रात को सोते समय पसीना आना शुरू हो जाता है |

– साँस फ़ूलनि शुरू हो जाती है और छाती में दर्द रहने लगता है |

गर्भावस्था में टी.बी का पता कैसे लगया जाता है ?

० यदि आपको तीन महीने से जायदा समय से खासी है तो यह तपेदिक का लक्षण हो सकता है | इसमें चित्सक आपके कफ का नमूना लेकर प्रयोगशाला में जाँच सकता है |
उसके बाद आपके रक्त के नमूने एवं शरीरक परीक्षण किया जायेगा , जिसमे आपको तपेदिक होने या न होने का पता चलेगा |
बहुत से मामलों में एक परीक्षण में तपेदिक का निदान नहीं होता , आपको दूसरे परीक्षण के लिए जाना पड़ेगा | इसमें आपकी छाती का एक्स-रे और आपकी त्वचा का परीक्षण किया जायेगा |
यह सब चित्सक की आवशकता के आधार पर हो सकते हैं |

अगर इसका उपचार समय पर नहीं किया गया तो आपको गर्भपात भी हो सकता है , इसी लिए अगर उपरोक्त दोनों में कोई परिणाम नहीं निकलता तो आपको त्वचा परीक्षण आकर वन चाहिए |

गर्भावस्था के दौरान टी.बी का उपचार -

टी.बी का रोग जीवाणुओं की वजह से होता है और इन्हे रोकने में लिए सिफरिश की गए सभी दवायां की एंटिबाइटिक हैं |
गर्भावस्था में अगर शुरुआत में ही टी.बी का पता चल जाये तो आप इसे आसानी से ठीक कर सकते हैं | इसके लिए आपको माहवारी के पुरे समय तक दवाई खानी पड़ती है | अगर आपके पेट में भ्रूण बन चूका है और फिर आपको टी.बी का रोग हुआ है तो आपको आपके मतपन के पुरे समय ९ महीनो तक दवाई खानी पड़ेगी |

– आपको अपने रोग प्रतिरोध स्वस्थ्य प्रणाली को मजूबत करना होगा , इसके लिए संतुलित आहार की जरूरत होगी | कुछ वाव्याम एवं दवायां भी जरूरी होंगीं |

– ताजी हवा में रहना होगा |

– चित्सक के साथ कोई भी मुलाकात छोड़नी नहीं चाहिए , क्यूंकि गर्भावस्था में यह रोग बहुत भयानक हो जाता है | इसकी रोकथाम के लिए चित्सक को आपकी सेहत में रो रहे परिवर्तन की हर पल की जानकारी होनी चाहिए एवं उसकी हर सलाह पर पूरा उतरना चाहिए |

– अपनी सोच को सकारात्म रखना होगी , क्यूंकि आपके ठीक होने में आपकी मनसुख सेहत का बहुत बड़ा हाथ होता है |

– यह एक संकर्मित रोग है | जीवाणु हवा और पानी के रस्ते से फैलते हैं | अगर आपको टी.बी या तपेदिक है तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा की आपके आसपास सफाई रहे और परिवार के अन्य – सदस्यों से सीधे संपर्क से बच कर रहे , क्यूंकि आपसे उनको भी तपेदिक हो सकता है |

यदि बच्चा माता के पेरत में है और विकासशील स्थिति में है तो उस पर प्रभाव लाजमी हैं | कई ट्रक हो सकते है जैसे की –
– समय से पहले पैदा होना
– गर्भपात भी हो सकता है –
– बच्चे का वजन कम हो सकता है
– बच्चे में रोग प्रतिरोध की क्षमता कम होती है | वह बार बार बीमार होता रहता है |
– जायदातर मामलों में टी.बी की बीमार होने पर बच्चे के जनम की सम्भावनाये बहुत कम रह जाती हैं |

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