पुरुष बाँझपन में शक्राणु पुनर्प्राप्ति के तरिके

पीसा . टीस , मीसा

बाँझपन का कारन जायदातर महिलों को समझा जाता है | 20 साल पहले के मामले में आजकल पुरुष बाँझपन बहुत बढ़ गए है और यह मामले महिला बाँझपन से दुगने हैं |इसके लिए जागरूकता फ़ैलाने की जरूरत थी | ईवा अस्पताल ने यह किया और बेहतर अनुभव और तकनीकों से इसके उपचार में बहुत सफलता पाई है |

सामान्य पुरुष में शक्राणु उत्पन होता है और अंडकोष में स्थिर रहता है | जब सम्भोग के दौरत वीर्य पुटिका से वीर्य निकला जाता है तब यह शक्राणु भी इससे मिल जाते है और वीर्य वाहिनी के रस्ते संख्लन स्थान तक पहुंचाया जाता है | उसके बाद यह महिला की फॉलोपियन नलिका से यात्रा करके अंडकोष में पहुंचकर अंडे से निशेषन करेगा | अजोस्पर्मिया किसी भी तरह का हो या कोई जन्मजात कारन हो अगर शक्राणु अंडे तक यार्ता करने के शक्षम नहीं है तो आप पिता नहीं बन सकते |

अवरोधक अझोस्पर्मिया- यदि इसका उपचार किया जाये तो 80 % मर्दों में एक महिला को गर्भवती करने के लिए पर्याप्त मरता में शक्राणु आ जाते हैं | समसन्य शक्राणु उसके अंदर बनने शुरू हो जाते हैं | पर्क्रतिक रूप से ही शक्राणुओं की गिनती पूरी हो जाती है |

गैर-आवाजाई अझोस्पर्मिया – यह एक ऐसी स्थिति है जब शक्राणु पैदा होते है लेकिन संख्लन के वक्त वह शिशन में प्रवेश करने की बजाए मूत्राशय के रस्ते से बहार निकल जाते है |
जब मनुष्य के नादर शक्राणु बनने बिलकुल बनंद हो जाये है तब प्रजनन की सभी करिएँ मुश्किल हो जाती हैं | इसका उपचार करने के लिए शल्य-चिकत्सा की आवशकता होती हैं | इससे शक्राणुओं की पुनर्प्राप्ति की जाती हैं |

शक्राणु पुनर्प्राप्ति के तरिके -

ईवा अस्पताल में तीन प्रकार की गतिविधयां उपयोग की जाती हैं , जिनसे शक्राणु पुनर्प्रति की जाती है | आईवीएफ भी एक सहायक तकनीक होती है , जब पुरुष बाँझपन का उपचार किया जाता है |

पीईइसए – पीसा

इस तकनीक में पुरुष के अंडाशय में सीधे एक सुई की मदद से शक्राणु निकले जाते हैं | इन शक्राणुओं का उपयोग आईवीएफ पर्किर्या में अंडा को फलित करने के लिए किया जायेगा | शक्राणु प्राप्ति की यह अच्छी तकनीक है और इसम शक्राणु को सीधे तौर पर अंडे में इंजेक्ट किया जाता है |

टीईएसई – टीस
इस तकनीक में पुरुष को बेहोश करके छोटी से शल्य-चिकत्सा की जाती हैं , जिसमे अंडाशय से एक परत निकल ली जाती है और बाद में प्रयोगशाला में इससे शक्राणु एकत्रित किये जाते हैं | चीरे पर टांकें लगाए जाते हैं और कुछ दिन में पुरुष ठीक जो जाता है |

आईसीएसआई और आईवीएफ दोनों में शक्राणु प्राप्ति बहुत जरूरी है , दोनों में अंडे और शक्राणु को परखनली में निशेषित किया जाता है |

एमईएसए – मीसा
इस तकनीक या उपयोग भी मरीज को बेहोश करके उसकी शल्य-चिकत्सा की जाती है और फिर वीर्य वाहिका नकिलों से शक्राणु प्राप्त किये जाते हैं | यह माइक्रोस्कोप के साथ की जाती हैं और इसमें काफी जायदा मात्रा में शक्राणु पुन्नप्राप्त किये जाते हैं |

पर्किर्या के बाद -

इनमे आपको अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती दो या तीन घंटों के बाद आप घर जा सकते हैं | अगर आपका उपचार मीसा तकनीक से हुआ है तो आप चार जा पांच दिन के बाद सामान्य अपने काम करने के काबिल हो जयेगें | बाकि दोनों में एक दिन का आराम बहुत होता है |
पीईएसए, टीईएसई और एमईएसए काफी अच्छे उपचार हैं , यह भारत में बहुत से लोगों को बाँझपन का उपचार करवाने में शक्षम करते हैं |
शक्राणुओं की पुनर्प्रति दूसरे मामलों में भी की जा सकती है जैसे कि मनुष्य को सम्भोग में दिलचस्पी न हो , किसी चिकत्सा की समस्या हगो या फिर कोई और दोष हो |

सफल आईवीएफ उपचार

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