ओव्यूलेशन प्रेरण

महिलाओं में अंडा विसर्जेन ने बारे में लोगों में बहुत सी चिंताएं और मान्यताएं है जिनका कोई आधार नहीं है | अगर इसे हम वैज्ञानिक तरीके से समझे तो बहुत सरलता से समज सकते हैं |

महिला के दो अंडाशय होते है और हर महीने एक अंडा जारी किया जाता है | इस प्रकिर्या को ओव्यूलेशन प्रेरण कहा जाता है | अगर दोनों अंडाशयों से अलग-अलग अंडा जारी कर दिया जाये , ऐसा बहुत ही काम मामलों में होता है , तो हम इस स्थिति को हम जुड़वां बच्चों के तौर पर जानते है |

जब अंडा जारी होने के बाद फॉलोपियन नलिका के रस्ते से गर्भशय में आता है तब वह शक्राणु के सम्पर्क में आकर भ्रूण का निर्माण होता है |
इसकीकरण अंडे पैदा और जारी करने का उपचार भी महिला बंझपन के उपचार की एक कड़ी है | उपचार के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले अंडो की पैदावार बढ़ाई जाती है |

भारत में यह मामला थोड़ा भिन्न है , जब एक महिला आईवीऍफ़ या ऐसी ही किसी अन्य उपचार पद्धिति से गुजरती है तो उसका ओव्यूलेशन प्रेरण/ अंडे उत्सर्जन का उपचार भी किया जाता है |

ओव्यूलेशन प्रेरण उन अण्डों को भी उत्तेजित करता है जिन्हें अंडाशय से जारी होने में कोई मुसीबत होती है | जबकि इसका मुख्या काम अंडाशय में अंडे पैदा करना है |

जब एक महिला के पास पुरुष हार्मोन की मात्रा तो बहुत होती है , लेकिन उसकी अवस्धी अनियमित होती है | इसी लिए महिला को ओव्यूलेशन प्रेरण की मदद से बहुत जायदा अंडे पैदा करने के योग्य बनाया जाता है , ता की जल्दी से जल्दी पुरुष हार्मोन से संक्रमण के बाद भ्रूण बन सके |

कारण -

इस रोग मर जो मूल कारण है वह है ,खून की कमी , अनियमित माहवारी , मोटापा या बचपन की गलत आदतें शामिल हैं |

उपचार -

उपचार में दवाएं सीधे तौर पर खाने को या फिर इंजेक्शन के रस्ते दी जा सकती हैं | दवाओं को मासिक चक्र के आधार पर सुनिश्चित किया जायेगा |

आपको मासिक चक्र के दो या चार दिन के बाद दवाएं शुरू की जाएगी | इस उपचार के दौरान रक्त परीक्षण , अल्ट्रासॉउन्ड व् अन्य परीक्षण किये जायेगें |

महिला की समभोग परवर्ती के आधार पर यह सब परीक्षण सुबह के वक्त किये जाते हैं | जिस दिन आपका चिकत्सक देखेगा की कम से कम चार अच्छी गुणवत्ता वाले अंडे तैयार है , तब वह महिला को एच्सीजी (एक दवाई का नाम) देगा |यह दवाई प्रजनन को उत्तेजित करने के लिए बनाई गए है | इंजेक्शन के ४८ घंटो बाद महिला अंडे जारी करने का काम शुरू कर देगी |

ओव्यूलेशन प्रेरण में उपयोग की जाने वाली दवाएं -

क्लोमिड (क्लोमीफीन सिट्रट ) मुख्य तौर पर खाई जाने वाली दवाई है | जायदातर चिकत्सक इसे शुरुआती दवाई के तौर पर इस्तेमाल करते हैं | इसका काम अंडे जारी करवना है |

गोनडोट्रॉपिन्स – यह इंजेक्शन के तौर पर दिए जाती है , यह अंडे पैदा करने के लिए अंडाशय को उत्तेजित करती है |

ओव्यूलेशन प्रेरण उपचार की भारत मर लागत -

ओव्यूलेशन प्रेरण भारत क्र कोई बहुत जायदा महंगा नहीं है | इसकी लागत चिकत्सक और अस्पताल के हिसाब से बदल सकती है | सामान्य तौर पवार यह लागत १००० से ३००० रूपये हो सकती है |

ओव्यूलेशन प्रेरण उपचार कितना सफल है -

जो महिलाएं भी ओव्यूलेशन से पीड़ित हैं , उनमे से लगभग ३० प्रतिशत महिलाये इन दवाओं से ही गर्भवती बनने में शक्षम हो सकती हैं | आपके शरीरक तत्व , बाँझपन के करण या अन्य स्थिति के आधार पर ही कोई फैसला हो सकता है |

सफल आईवीएफ उपचार

शिखर की आईवीएफतकनीकें

शिक्षित एवं पेशेवरकर्मचारी

(C) Copyright 2017 - EVA Hospitals All rights reserved.