लेजर सहायक हैचिंग -

इस तकनीक में लेज़र की मदद से ग्लाइकोप्रोटीन की एक परत को खोल दिया जाता है ता की भ्रूण के ऊपर की परैत को ख़तम किया जा सके | ऊपर परत से महत्वपूर्ण तत्व ज़ोना पेलुसीडा को हटाया जाता है और सुखमदर्शी में रखा जाता है | यह बहुत अव्शक है क्यों की सिर्फ एक ही शक्राणु अंडे में इंजेक्ट होगा और यही गर्भधारण का कारन बनेगा | भारत में आप लेज़र सहायक हैचिंग तकनीक से उपचार के लिए किस बेहतर इस्त्री राग विशषज्ञ से परामर्श क्र सकते हैं |

लेज़र का उपयोग शैल को नरम करने के लिए किया जाता है और इसी की मदद से भ्रूण को खोला जाता है | लेज़र का कोई पर्तक्ष संपर्क भ्रूण के साथ नहीं होता | यह तो सिर्फ बहुत विनम्र और आरामदायक तरिके से काम करने में मदद करती है इस तकनीक से महिलाओं के गर्भधारण के मामलों में वृद्धि होती है |

लेज़र पर्किर्या बहुत कम समय में होने वाली और भ्रूण को जेहरीले रसायनो के संपर्क से बचने वाली तकनीक है | भ्रूण के ऊपर से तनाव और दवाब को कम और खतम करने के लिए बहुत महतवपूरण है | यह भ्रूण को हर प्रकार के शरीरक हेर-फेर से सुरक्षित रखती है |

लेज़र सहायता से अंडे सेने के लिए सही उमीदवार कोण हैं ?

– आईवीएफ और आईसीइसआई तकनीकों से उपचार करवाने वाले इस तकनीक से अंडे सेने के लिए उचित हैं |

– ठन्डे संभाले हुए भ्रूण स्थानांतरण करने वाले जोड़े लेज़र सहायता से अंडे सेने के लिए सही उमीदवार हैं |

– जिनकी आयु 37 वर्ष या जायदा है और अंडे का उत्पादन सही से नहीं हो प् रहा , अंडे की गुणवत्ता खराब है |

– जिनके अंदर उत्तेजित करने वाले हार्मोन्स का स्तर बहुत ऊँचा हैं |

विवरित भ्रूण के लिए लेजर सहायक हैचिंग -

अंडे का एक बाहरी सुयक्षात्मक खोल होता है जिसे जोना पेलुसीडा कहा जाता है | मनुष्य के अंडे को परखनली में निशेषित करने के लिए पहले से पांचवे दिन तक किया जाता है | अंडे की बहरी परत बहुत जायदा सख्त नहीं होती , आसानी से इसके अंदर शक्राणु को इंजेक्ट कर दिया जाता है | पतली जोना पेलुसीडा की परत के ाकरण भ्रूण को खोलने और अंदर जाने में आसानी रहती है , लेकिन अगर आप जमे हुए अंडे की बात करे तो इसमें बाहरी खोल बहुत सख्त हो जाता है | इसे लेज़र सहायता तकनीक से खोला जाता है और इसके अंदर शक्राणु को इंजेक्ट किया जाता है |
अगर ठण्ड पर्किर्या के कारण बाहरी शैल क्षतिग्रस्त हो जाये तो अंडा फलित होने के लायक नहीं रहता |
लेज़र सहयता तकनीक एक ऐसा पारकर्म है जिससे अंडे की बाहरी परत को हल्का किया जाता है और उसके अंदर जा कर भ्रूण पर काम किया जाता है | अगर लेज़र शाहयक तकनीक नए भ्रूण के साथ की जा रही है तो यह आसान और कम साये लेने वाला काम है और अगर यह जमे हुए भ्रूण पर कारण है तो यह बहुत जायदा कठिन और लम्बा काम है | हालाँकि जमे हुए भ्रूण में लेज़र सहायता प्राप्त तकनीक से उपचार करने के बाद गर्भधारण सफल होने की मौके बहुत जायदा होते हैं |

सफल आईवीएफ उपचार

शिखर की आईवीएफतकनीकें

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