महिला बाँझपन - अवधारणा की बाधाएं

बाँझपन उपचार केंदर में यह एक बहुत ही विनाशकारी चलन है की बाँझपन का सिर्फ निदान किया जा सकता है | बाँझपन की मानक परिभाषा एक साल तक असुरक्षित सेक्स के बाद भी महिला का गर्भधरण करने में असमर्था है | २०% महिलाएं अपने आप को दुविधा में पाती है जब वह गर्भधरण करने में असमर्थ होती है, जबकि उनकी आयु भी जायदा नहीं होती |

फिर भी समस्या क्या है ?

आयु प्रजनन क्षमता में सर्वोचत्म माप के रूप में कार्य करती है , फिर भी २० से २५ साल की महिलाएं भी बाँझपन से पीड़ित होती हैं | अस्पष्टीकृत बाँझपन के इलावा कभी कभी जीन भी बाँझपन के लिए दोषी होते है , एक महिला को निम्नलिखित करने से भी बाँझपन हो सकता है ;

१. 1. क्षतिग्रस्त फैलोपियन टियूब –

फॉलोपियन टियूब महिला प्रजनन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है जो की महिला की गर्भावस्था में सुविधा देती हैं | फॉलोपियन टियूब का क्षतिग्रस्त होना कई कारणों से हो सकता है ;

– संक्रमण
यौन संचालित रोग फॉलोपियन टियूब में संक्रमण का एक प्रमुख कारन है | यह संक्रमण बेक्टेरिया और वायरस से भी हो सकता है | इन बेक्टेरिया के कारन सूजन उत्पन होती है |

इस श्रेणी में सबसे सामान्य हालत हयड्रोसलपिंक्स होते है जो की फॉलोपियन टियूब के लिए सामान्य हालत होते है |
यह वह जगह होती है जहा पर फ़ेलोपियन तुबे दोनों सिरों से लगी होती है और टियूब में द्रव का संग्रह होता है |

– पिछली शल्य चिकत्सा –
पहले की गई पेट की किसी शल्य चिकत्सा के कारन फॉलोपियन टियूब में विकार आता है जो की अंडे को पार जाने से रोकता है |

– पेट की बीमारियां –
पेट में पथरी और कोलाइटिस पेट की बीमारियां है जो पेट की गुहा की सूजन का कारन बनती है | ये रोग फैलोपियन टियूब में रुकावट और जलन पैदा कर सकते हैं |

– अस्थानिक गर्भावस्था –
यह गर्भावस्था का वह रूप है जो की गर्भशय की जगह फॉलोपियन टियूब में पैदा होता है | इस तरह के गर्भधरण में तत्काल उपचार की जरूरत होती है | गार उपचार न हो तो यह फॉलोपियन टियूब को नुकसान पहुंचता है |

– जन्मजात दोष –
अगर कोई महिला टीयूबेल असमनताओं के साथ पैदा हुई थी |

लगभग ३१% महिलों के बाँझ होने में उनके फॉलोपियन टियूब का दोष है |

२ . ओव्यूलेशन विकार-
शयद आप नहीं समझ सकते की ओव्यूलेशन एक महिला के लिए कितना महत्वपूर्ण है , पर यह आपको ओव्यूलेशन और प्रजनन क्षमता के बारे में महतवपूरण जानकारी प्रदान करने के लिए है |

ओव्यूलेशन हर महीने होना चाहिए और और यह पर्किर्या यहाँ एक महिला के अंडाशय ने अंडे जारी किये है उन्हें फलित करने के लिए होता है | यदि यह अंडे फलित नहीं किये जा सकते तो इन्हे गर्भशय से बहार बहा दिया जाता है |

भारत मने लगभग १० % महिलाएं ऐसी है जिन्हे महिला बांझपन उपचार की जरूरत है | इन सब महिलाओं में ओव्यूलेशन विकार है और उसके कारन हैं ;

– हार्मोनल असंतुलन –
हार्मोन्स बॉडी की हर किर्या को निर्धारित करते है , अधिकांश महिलाएं जिनमे अनओवुलेशन होता है , उनमे शरीर में या तो नर हार्मोन बढ़ जाते हैं या कम हो जाते है | महिला हार्मोन की कमी को ओव्यूलेशन करार दिया जाता है |

– समय से पहले रजोनिवृत्ति –
यह एक बहुत ही दुर्लभ लेकिन संभावित एनोव्यूलेशन का कारन है | कभी कभी यह अनुवंशकी कारणों से सम्बंधित हो सकता है लेकिन इसके जायदातर कारन अभी बातये नहीं जा सकते |
समय से पहले रजनोवृत्ति एक ऐसी स्थति है , जहाँ पर अंड़ष्य अंडे बनाना बंद कर देता है | वजन कम होने की वजह से और गहन अभ्यास होने के कारन समय से पहले रजनोवृत्ति होने की समस्या आती है |

– जख्मी अंडाशय –
अंडाशय में जखम किसी ऑपरेशन या संक्रमण से हो सकता है | ऑपरेशन अप्रत्यक्ष रूप से अंडाशय को नुकसान पहुंचता है , जो की अंडाशय में घाव होने की प्रमुख वजह है |

– कूप के मुद्दे –
एक महिला अपने अंदर सामन्य रूप से कूप पैदा करती है जिसके अंदर अंडा होता है | यह अंडे की बाहरी परत होती है , लेकिन कई बार कुछ मुद्दों के कारन यह कवच नहीं टूट पता , जो की समस्या के कारन बनता है |

३. अंतर्गर्भशय परत
गर्भशय की परत को अंतर्गर्भशय या अंतर्गर्भशयकला भी कहा जाता है | बाँझपन के कारन इसकी आकृति में असमानताएं हो सकती है |
फाइब्रॉएड और एवं पोलिप्स दो ऐसी समस्यां हैं जिनके कारन मासिक धरम में भरी मात्रा में खून बहता है | मासिक धर्म बहुत दर्दनाक हो जाता है |

महिला बाँझपन उपचार -

बाँझपन की बीमारी की अच्छी समझ, इसके आधार पर उचित निदान एवं एक प्रभावी उपचार महिला की गर्भधारण में मदद कर सकते हैं | आधुनिक तकनीके जैसे एआरटी , आईवीऍफ़ केंद्रों के किया जाने वाला बेहतर इलाज , प्रजनन दवाओं के साथ या उनके बिना भी गर्भधारण में मदद करते हैं | बांझपन के कारण और प्रकार के आधार पर, भारत में महिला बाँझपन उपचार लागत एक दंपति से दूसरे में बदलती है।
यह माना जाता है की जब आईवीऍफ़ उपचार किया जाता है तो यह एक चुना हुआ उपचार होता है |

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