परखनली में भ्रूण पैदा करना or
भ्रूण पैदा करना और संभालना

आईवीऍफ़ पर्किर्या के दौरान महिला के अंडाशय में जायदा अंडे पैदा करने के लिए महिला को उत्तेजक दवाएं दी जाती हैं | शक्राणु और अंडे निषेचन के बाद सबसे अच्छा भ्रूण गर्भधारण के लिए चुना जाता है | अगर एक बार में पर्किर्या असफल हो जाये तो जो भ्रूण बच जाते है, उनका इस्तेमाल दूसरी बार के लिए और भ्रूण दान करने के लिए किया जाता है |

भारत में भ्रूण को रखने की विचि को कर्योपरेसेर्वेशन कहा जाता है | इस पर्किर्या में भ्रूण को बहुत कम तापमान पर रखा जाता है | प्रयोगशाला में खास उपकरण का उपयोग करके इसे ठंडा रखा जाता है | अगर भ्रूण को बहुत लम्बे समय तक संभालना है तो इसे तरल नाइट्रोजन में रखा जाता है | भरता म,इ इसकी लगता अन्य देशों से बहुत कम है |

भ्रूण को ठंडा करने के क्या फायदे हैं -

ठंडा करके भ्रूण को बहुत देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है | ठंडा रखने के बाद भ्रूण को महिला क्र गर्भशय में स्थानांतरण किया जाता है |

भ्रूण सम्भलने की तकनीक -

चिकत्सक महहला के गर्भशय में विकास को देखने के लिए अल्ट्रासॉउन्ड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल क्र सकता है | वह लगातार इस विकास पर और गर्भशय के अंदर होने वाले परवर्तनो पर नजर रखता है | सही समय आने पर वह भ्रूण को गर्भशय में स्थानांतरित करता है |

पर्किर्या के कदम -

– सबसे पहले भ्रूण को इनक्यूबेटर से बहार निकलना होता है | इनक्यूबेटर एक प्रयोगशाला का यंत्र है जिसका तापमान ३७० डिग्री सेल्सियस होता है | यहाँ से निकलने के बाद उसे कक्षं के सामान्य तापमान पर सीपीए के घोल में डुबोया जायेगा | इसे 8 मिनट के लिए घोल में रखना है | यह अधिकतम समय है | इतने समय में यह पहले सिकुड़ेगा और पुन: विस्तार करेगा | सीपीए इसकी कोशिकाओं में प्रवेश करेगा |

– दुस्र्रे कदम में भ्रूण को पहले से जायदा मजबूत सीपीए के घोल में रखा जाता है और एक मिनट के लिए संतुलित किया जाता है |

– हर एक भ्रूण को अलग अलग अच्छी तरह से रखा जता है और उन पर लेबल लगया जाता है | जिस पर माता-पिता का नाम , समय , जनम तारीख और चिकत्सक का नाम लिखा होता है , जिसने भी भ्रूण को पैदा किया है |

– आखिरले पड़ाव में परखनली के दोनों सिरों को बंद क्र दिया जाता है और उसे तरल नाइट्रोजन में दाल दिया जाता है , जिसका तापमान -1960 डिग्री सैल्सियस होता है |

कितनी देर तक रखा जा सकता है ?

इसका समय अब तक कोई नहीं बता पाया है | यह पर्किर्या 1984 में शुरू हुई थी अब तक भ्रूण को तीस साल तक संभाला गया है | बहुत से लोग भ्रूण को छोड़ जाते हैं और १५ से २० साल बाद वापिस आते हैं | जायदा से जायदा कितनी देर भ्रूण को रखा जा सकता है इसका कोई पक्का सबूत नहीं है |

नुकसान -

इतने फायदे होने के बाद इसके कुछ नुकसान भी हैं | जैसे भ्रूण बनाने के बाद 70 प्रतिशत भ्रूण बच जाते है , जो की स्थानांतरण नहीं हो पते और नाइट्रोजन में संभलकर रखे गए भ्रूणों में से 40 प्रतिशत भ्रूण स्थांतरण के बाद विकास नहीं करते |

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