ब्लास्टोसीस्ट ट्रांसफर और यह कैसे काम करता है |

भारत के लगभग सभी आईवीएफ केंद्रों में ब्लास्टोसीस्ट ट्रांसफर को परखनली शिशु की सफलता का आदर्श माना जाता है | यह आईवीएफ तकनीक के साथ ही किया जाता है और यह गर्भधारण करने की समरथा कोई कई गुना बड़ा देता है |आईवीएफ तकनीक की सफलता कई गुना बढ़ गयी है |

पर्किर्या -

आईवीएफ में अंडे और शक्राणु निकल कर उपचार के बाद निशेषण करवाया जाता है और भ्रूण बनने पर तत्काल उसे गर्भशय में स्ताहनान्तरित कर दिया जाता है | लेकिन इस तकनीक में भ्रूण को 5 से 6 दिन के लिए और परखनली में रखा जाता है | जब भ्रूण ब्ल्लास्टोसिस्ट में बदलने लगता है तब उसे स्थानांतरित किया जाता है |
ऐसा करने से गर्भधारण की सम्भयावना कई गुना जायदा हो जाती है |

ब्लास्टोसिस्ट एक से जायदा बच्चों के जनम की सम्भावना को कैसे कम करता है ?

आईवीएफ तकनीक में 3 से 4 भ्रूणों को शतानान्तरित किया जाता है जो की एक से जायदा बच्चों के जनम को दावत देते हैं | ब्लास्टोसिस्ट पर्किर्या में चिकत्सक भ्रूण के विकास को देख सकते हैं और कंट्रोल भी कर सकते हैं | यहीं पर चिकत्सक इस समस्या को ख़तम क्र देते हैं | इस पर्किर्या में एक या दो भ्रूण स्ताहनान्तरित किया जाते है ऑन उनपर अच्छी तरह से नजर रखी जाती है |
भारत में ब्लास्टोसिस्ट पर्किर्या महंगी है , लेकिन जिस तरिके से यह दो से जायदा गर्भधारण के खतरे को कम करती है , इसकी कीमत का कोई महतव नहीं रखती |

इस तकनीक से पर्जनन माहिर निचे लिखे हुए काम क्र सकता है -

भ्रूण की निगरानी –
भ्रूण के विकास की काफी लम्बे समय तक निगरानी हो सकती है , क्यूंकि भ्रूण को स्थानांतरित करने का समय बढ़ जाता है | भ्रूण में छोटी से छोटी किसी भी कमी या विकार को खोजा जा सकता है और समय रहते उसे दूर किया जा सकता है |

भ्रूण चयन – सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला भ्रूण गर्भधारण के लिए उपयोग किया जाता है | भ्रूण का चयन जायदा अच्छी तरह से किया जा सकता है |

ईवा अस्पताल में प्रजनन माहिर आपको ब्लास्टोसीस्ट ट्रांसफर तकनीक से जल्दी और जायदा सम्भावना वाला सुरक्षित गर्भधारण करवाने के लिए विश्व-स्तर्य तकनीक के साथ तैयार हैं |

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